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हिंदू पंचांग के अनुसार 2 फरवरी 2026 से फाल्गुन मास की शुरुआत हो गई है। यह मास वर्ष का अंतिम महीना माना जाता है और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे आत्मशुद्धि, पुराने कर्मों के परिमार्जन और नए संकल्पों का समय कहा गया है। ऋतु परिवर्तन के इस काल में प्रकृति के साथ-साथ मानव जीवन में भी सकारात्मक बदलाव की अनुभूति होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि फाल्गुन मास में किया गया धार्मिक आचरण मन, शरीर और आत्मा—तीनों को संतुलित करता है। फाल्गुन मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
फाल्गुन मास भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना को समर्पित माना जाता है। इसी महीने महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख पर्व आते हैं, जो तप, साधना और उल्लास—तीनों का संतुलन दर्शाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय ग्रहों की स्थिति ऐसी रहती है कि भक्ति, सेवा और संयम का फल शीघ्र प्राप्त होता है। फाल्गुन आत्मिक नकारात्मकता को त्यागकर जीवन में नई ऊर्जा और आशा का संचार करता है।
फाल्गुन मास में दान और सेवा का महत्व
फाल्गुन मास को दान-पुण्य के लिए विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान जरूरतमंदों की सहायता, अन्न-वस्त्र का दान और सेवा भाव से किए गए कार्य जीवन में संतुलन और स्थिरता लाते हैं। धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस महीने किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिस्थितियों का निर्माण करता है और मानसिक संतोष प्रदान करता है। सेवा और करुणा का भाव जीवन में सुख-शांति की नींव रखता है।
फाल्गुन मास में अपनाएं सात्विक जीवनशैली
इस महीने संयमित और सात्विक जीवन अपनाने पर विशेष बल दिया गया है। नियमित पूजा, ध्यान और जप से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और तनाव कम होता है। शिव और श्रीकृष्ण की उपासना से आत्मविश्वास और धैर्य में वृद्धि होती है। फाल्गुन आत्मचिंतन का समय है, जब व्यक्ति अपने व्यवहार, विचार और कर्मों को सकारात्मक दिशा दे सकता है।
फाल्गुन में किन बातों में रखें सावधानी
फाल्गुन मास में होलाष्टक की अवधि को विशेष रूप से संयम का समय माना जाता है। इस दौरान बड़े मांगलिक निर्णयों से बचने और भक्ति पर ध्यान केंद्रित करने की परंपरा रही है। नकारात्मक भावनाओं, अत्यधिक क्रोध और असंयमित दिनचर्या से दूरी बनाए रखना इस मास के मूल भाव के अनुरूप माना गया है। संयम और संतुलन ही फाल्गुन का वास्तविक संदेश है।
फाल्गुन मास से मिलने वाले विशेष लाभ
फाल्गुन मास आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और जीवन में स्थायित्व प्रदान करने वाला माना गया है। इस दौरान अपनाया गया सात्विक आचरण और धार्मिक अनुशासन आने वाले समय के लिए मजबूत आधार तैयार करता है। होलिका दहन के साथ पुरानी नकारात्मकताओं को त्यागने और नए संकल्प लेने की भावना इस मास को विशेष बनाती है।
फाल्गुन मास हमें यह सिखाता है कि शुद्ध विचार, सेवा भाव और संतुलित जीवन से ही वास्तविक सुख और सकारात्मक परिवर्तन संभव है। इस पावन समय का सदुपयोग कर जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।
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