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लोकसभा में पास होगा परिसीमन बिल? DMK ने रखीं 3 शर्तें
By Lokjeewan Daily - 07-08-2026

संसद में बहुचर्चित और विवादित 'परिसीमन संशोधन विधेयक' (Delimitation Bill) को लेकर देश की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अगुवाई वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) केंद्र की मोदी सरकार को इस बिल पर समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। हालाँकि, पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके लिए केंद्र सरकार को DMK की 3 प्रमुख शर्तें माननी होंगी।

पहली शर्त यह है कि DMK चाहती है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या पर लगी रोक (फ्रीज) बनी रहे, जो 2027 में खत्म होने वाली है। DMK सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि संविधान संशोधन के ज़रिए इस रोक को और 25 साल के लिए बढ़ा दिया जाए।

दूसरी शर्त यह है कि स्टालिन की पार्टी ने मांग की है कि सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की एकसमान बढ़ोतरी की जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में निचले सदन में बिल पेश करते समय मौखिक रूप से इसका भरोसा दिया था।

इन दो शर्तों के अलावा, DMK यह भी चाहती है कि केंद्र सरकार नए कानून के साथ-साथ सभी राज्यों के बदले हुए लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची भी जारी करे।

पार्टी सूत्रों ने इंडिया टीवी को बताया कि अगर केंद्र सरकार इन तीनों शर्तों को मानने का फैसला करती है, तो DMK परिसीमन बिल का समर्थन करने को तैयार है। हालांकि, इस बारे में अंतिम फैसला पार्टी का नेतृत्व बिल के फाइनल ड्राफ्ट और उसके सभी प्रावधानों की जांच-पड़ताल करने के बाद ही लेगा।

अब तक DMK ने परिसीमन बिल का पुरजोर विरोध किया है और इसे राज्यों, खासकर दक्षिण के राज्यों के हितों के खिलाफ बताया है। हालांकि, जब से कांग्रेस ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की 'तमिलगा वेट्री कड़गम' (TVK) के साथ गठबंधन किया है और DMK के साथ उसका गठबंधन खत्म हुआ है, तब से ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं कि स्टालिन की पार्टी इस कानून का समर्थन कर सकती है।

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