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हरियाली अमावस्या पर धर्म और प्रकृति का अद्भुत संगम, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड
By Lokjeewan Daily - 12-08-2026

- ़प्राकृतिक स्थलों पर पिकनिक मनाने वालों का लगा तांता
- शिवालयों में दिनभर चला भजन-कीर्तन का दौर  
 भीलवाड़ा लोकजीवन। सावन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या पर वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में बुधवार को धर्म, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह से ही शहर के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शिवालयों में हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। शहर के प्रसिद्ध हरणी महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया। इसके बाद शिवलिंग का विशेष शृंगार किया गया। मंदिर परिसर में दिनभर भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ भगवान शिव को मालपुए और खीर का विशेष भोग लगाया। बाद में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। शहर के अन्य शिवालयों में भी विशेष धार्मिक आयोजन हुए। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। महिलाओं और युवाओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे।
पौधारोपण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
हरियाली अमावस्या के अवसर पर शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी गूंजा। विभिन्न सामाजिक संगठनों और क्लबों की ओर से शहरभर में सघन पौधारोपण अभियान चलाया गया। पार्कों, विद्यालय परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर नीम, पीपल, बरगद सहित फलदार पौधे लगाए गए। आयोजकों ने लोगों को केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प भी दिलाया। लोगों ने पौधों की सुरक्षा और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
पिकनिक स्पॉट पर मेले जैसा माहौल
हरियाली अमावस्या पर शहर के आसपास के प्राकृतिक स्थलों पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मेजा बांध, हरिणी महादेव की पहाडय़िां और स्मृति वन में परिवारों के साथ पिकनिक मनाने वालों की भीड़ रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने प्राकृतिक वातावरण के बीच दिन का आनंद लिया। कई स्थानों पर मेले जैसा माहौल नजर आया। बाजारों में भी हरियाली अमावस्या की रौनक देखने को मिली। घेवर और पारंपरिक पकवानों की दुकानों पर खरीदारी के लिए भीड़ रही। लोगों ने धार्मिक परंपराओं के साथ प्रकृति के संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण कर पर्व को सार्थक बनाया।

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