आरएसएस का ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम, 2.1 किमी लंबी मानव श्रृंखला देख भावुक हुए लोग
- शहर में तीन जगह से निकले विशाल पथ संचलन - अंबेडकर चौराहे पर हुआ हजारों स्वयं सेवको का संगम
भीलवाड़ा लोकजीवन। विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष (101वें वर्ष में प्रवेश) के अवसर पर मंगलवार को वस्त्रनगरी में अनुशासन, एकात्मता और राष्ट्रभक्ति का ऐसा विराट नजारा देखने को मिला, जिसे देखकर शहरवासी नतमस्तक हो गए। संघ स्थापना दिवस पर भीलवाड़ा महानगर में आयोजित भव्य ‘त्रिवेणी संगम पथ संचलन’ के तहत शहर के तीन अलग-अलग स्थानों से निकले हजारों स्वयंसेवकों का ठीक प्रात: 10 बजकर 21 मिनट पर अंबेडकर चौराहा/रेलवे स्टेशन क्षेत्र में ऐतिहासिक संगम हुआ। इस अद्भुत दृश्य को देख संगम स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और संघ कार्यकर्ताओं की आंखों से खुशी और भावुकता के अश्रु बह निकले। तय समय सारणी के अनुसार कृषि उपज मंडी (संचलन-1), हरी सेवा धाम (संचलन-2) और राजेंद्र मार्ग विद्यालय (संचलन-3) से स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियां कदमताल करते हुए आगे ब?ीं। पूर्ण गणवेश (टोपी, कमीज, बेल्ट, पैंट, मोजे और जूते) में हाथ में दंड थामे स्वयंसेवक जब पूर्ण लयबद्धता के साथ सडक़ों पर निकले, तो पूरा शहर भारत माता के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अंबेडकर चौराहे पर तीनों संचलनों का एक साथ मिलना और उसके बाद प्रात: 10:26 बजे गोलप्याऊ चौराहे से अलग-अलग मार्गों के लिए प्रस्थान करना एक संगठनात्मक चमत्कार जैसा प्रतीत हो रहा था।
गोलप्याऊ चौराहे का क्षेत्र मुख्य आकर्षण
संचलन का सबसे मुख्य आकर्षण भीमगंज थाने से एमजी अस्पताल के मुख्य द्वार और गोलप्याऊ चौराहे का क्षेत्र रहा। भीमगंज थाने से सर्राफा बाजार, बड़ा मंदिर, धानमंडी, शहीद चौक, सांगानेरी गेट (झलकारी देवी चौराहा), माली समाज नोहरा, ब्रज कोट के माताजी और माणिक्य नगर होते हुए जब संचलन क्रमांक-1 वापस भीमगंज थाने पहुंचा, तो संचलन-2 व 3 उसी मार्ग में प्रवेश कर रहे थे। इस प्रकार पूरे 2.1 किलोमीटर के दायरे में स्वयंसेवकों की एक अटूट रिंग (मानव श्रृंखला) बनकर तैयार हो गई। आगे चल रहा संचलन और पीछे से प्रवेश करता दूसरा संचलन यह दृश्य अनुशासन का चरम प्रस्तुत कर रहा था। सडक़ के दोनों ओर कड़ी सुरक्षा और पुलिस प्रशासन की पुख्ता बैरिकेडिंग रही। संचलन के पीछे चल रही जीपों में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार, माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर और भारत माता के विशाल चित्र सुसज्जित थे। इन वाहनों के चालक भी पूर्ण गणवेश में मौजूद थे।
संतों का मिला सानिध्य
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए राष्ट्रीय संत आचार्य पुलक सागर, युवाचार्य महेंद्रऋषि , संत मायाराम, महामंडलेश्वर बाबूगिरी , लालबाबा, पुजारी मुरारी पांडे एवं जैन साध्वियों सहित प्रमुख संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक चांदमल सोमानी, महानगर संघ चालक कैलाश खोईवाल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी व संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुरेश भाई, मि_ू लाल स्वर्णकार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति रही। शहर के प्रमुख सामाजिक, धार्मिक व व्यापारिक संगठनों द्वारा जगह-जगह मंच बनाकर संचलन पर जोरदार पुष्पवर्षा की गई और तोरण द्वारों से मार्ग को सजाया गया। संघ के 100 वर्ष की साधना और 101वें वर्ष के पदार्पण पर यह आयोजन भीलवाड़ा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है।
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