एमजीएच के पालने में आया नवजात, सांसों से जूझ रहा मासूम, बाल कल्याण समिति ने दिया ‘सोम’ नाम
- सुबह 7 बजे पालने की घंटी बजी - एनआईसीयू वार्ड में उपचार जारी
भीलवाड़ा लोकजीवन न्यूज। ममता की छांव से महरूम और अपनों की बेरुखी का शिकार होकर महज कुछ घंटों का एक मासूम जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। शहर के महात्मा गांधी चिकित्सालय परिसर स्थित मातृ एवं शिशु इकाई के बाहर लगे पालना गृह में सोमवार अलसुबह एक अज्ञात नवजात मिला। लाचारी, ठंड और बीमारी से जूझ रहे इस बच्चे को तत्काल अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने के लिए जुटी हुई है। बाल कल्याण समिति ने सोमवार को मिलने के कारण इस बच्चे का नाम ‘सोम’ रखा है।
अचानक गूंजी घंटी और दौड़े स्वास्थ्यकर्मी
सोमवार सुबह करीब 7 बजे जब पूरा शहर जाग ही रहा था, तभी मातृ एवं शिशु इकाई के पालना गृह का अलार्म अचानक तेज आवाज में बज उठा। घंटी सुनते ही ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षाकर्मी तुरंत पालने की तरफ दौड़े। पालने के भीतर कपड़ों में लिपटा हुआ एक नवजात सिसक रहा था। मौके पर कोई मौजूद नहीं था—उसे जन्म देने वाले या वहां छोड़ जाने वाले अज्ञात लोग खामोशी से ओझल हो चुके थे। बच्चे का शरीर ठंड की वजह से सुन्न पड़ रहा था और वह खुलकर सांस भी नहीं ले पा रहा था। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए स्वास्थ्यकर्मियों ने बिना एक पल गंवाए नवजात को सीधे एनआईसीयू वार्ड पहुंचाया, जहां तुरंत वार्मर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर लेकर प्राथमिक जीवनरक्षक प्रक्रिया शुरू की गई।
वजन मात्र डेढ़ किलो, प्री-मैच्योर होने की आशंका
शुरुआती स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आया कि नवजात लडक़ा है और उसका वजन महज 1.5 किलोग्राम है, जो सामान्य नवजात शिशु के औसत वजन ढाई से तीन किलो की तुलना में बेहद कम है। अत्यधिक कम वजन और फेफड़ों के पूरी तरह विकसित न होने के कारण बच्चे को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चा समय से पूर्व जन्मा प्रतीत होता है। ठंड के संपर्क में आने और संक्रमण के खतरे को देखते हुए उसे निरंतर सघन निगरानी में रखा गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसके वाइटल्स स्थिर करने के प्रयास में जुटी है।
सोमवार को मिला, इसलिए नाम पड़ा ‘सोम’
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष चंद्रकला ओझा ने बताया कि सोमवार का दिन होने के कारण समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस मासूम का नामकरण ‘सोम’ किया है। अध्यक्ष ने कहा कि नवजात की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। समिति की प्राथमिकता बच्चे को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए अस्पताल अधीक्षक को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया गया है, जिसमें बच्चे के उपचार के लिए वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों का विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने, चौबीसों घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात करने और नियमित हेल्थ बुलेटिन समिति को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जिंदगी की जंग जीत जाए नन्हा योद्धा, हर आंख में दुआ
पालने में लावारिस छोड़े जाने की इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर समाज के संवेदनशील ताने-बाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के वार्ड से लेकर गलियारों तक हर कोई इस बात से स्तब्ध है कि कोई कलेजे के टुकड़े को इस बेरहमी से बेगाना कैसे कर सकता है। फिलहाल, दवा और दुआ दोनों के सहारे सोम अपनी सांसों की डोर थामे रखने का संघर्ष कर रहा है। अस्पताल स्टाफ से लेकर वहां मौजूद हर तीमारदार यही प्रार्थना कर रहा है कि यह नन्हा योद्धा जिंदगी की इस जंग को फतह करे और स्वस्थ होकर एक महफूज भविष्य की ओर कदम बढ़ाए।
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