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भीलवाड़ा

त्यौहार की मिठास में न घुल जाए मिलावट का जहर, सिंथेटिक दूध-मावे से फूड पॉइजनिंग का भारी जोखिम

- नकली वर्क और घटिया स्टार्च से लिवर-किडनी को  नुकसान  - चटक रंगों वाली मिठाइयों से परहेज करना बहुत जरूरी

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लोकजीवन संवाददाता

05 नवम्बर 2026, 02:05 PM 2 मिनट में पढ़ें

त्यौहार की मिठास में न घुल जाए मिलावट का जहर, सिंथेटिक दूध-मावे से फूड पॉइजनिंग का भारी जोखिम

 भीलवाड़ा लोकजीवन न्यूज। दीपोत्सव के स्वागत में घरों में मिठाइयों का आदान-प्रदान और सामूहिक दावतें आम बात हैं। लेकिन त्योहारी सीजन में दूध और मावे की अचानक बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए मिलावटखोरों का सिंडिकेट भी सक्रिय हो जाता है। मुनाफा कमाने की होड़ में बाजारों में डिटर्जेंट, यूरिया, रिफाइंड पाम ऑयल और सिंथेटिक केमिकल से तैयार नकली मावा और पनीर खपाया जा रहा है। ऐसी मिलावटी और दूषित खाद्य सामग्री त्योहार के उल्लास को बीमारी के साए में बदल रही है, जिससे फूड पॉइजनिंग और पेट के गंभीर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।   सरकारी और निजी अस्पतालों के मेडिसिन वार्डों में दीपावली के आसपास एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस, पेट में तेज मरोड़, लगातार उल्टी, खूनी दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीजों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। वरिष्ठ फिजिशियनों का कहना है कि नकली मावे में प्रयुक्त रसायन आंतों की आंतरिक म्यूकोसा परत को बुरी तरह छलनी कर देते हैं। इसके अलावा मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गैर-खाद्य रासायनिक रंग और चांदी के वर्क की जगह लगाया जाने वाला एल्युमिनियम फॉयल सीधे लिवर और किडनी पर विषैला प्रभाव डालते हैं। बासी चाशनी में दोबारा तली गई मिठाइयां और लंबे समय से रखे मावे के पेड़े बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन का बड़ा जरिया बन जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे मिठाइयां खरीदते समय सतर्कता बरतें। जरूरत से ज्यादा चमकीली, अत्यधिक चटक रंगों वाली और बाजार भाव से बहुत सस्ती मिलने वाली मिठाइयों से पूरी तरह दूरी बनाएं। मिठाइयों की खुशबू और बनावट की जांच करें; यदि उसमें बासीपन, खट्टापन या रासायनिक गंध आए तो उसका सेवन न करें। चांदी के वर्क को अंगूठे पर रगडक़र देखें, यदि वह काला पड़ जाए या गोली बन जाए तो वह नकली है। हो सके तो इस दीपावली पर मावे की मिठाइयों के स्थान पर सूखे मेवे (काजू, बादाम, अखरोट), ताजे फल या घर पर तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजनों को प्राथमिकता दें। उल्टी-दस्त की समस्या होते ही तुरंत ओआरएस का घोल लें और बिना योग्य चिकित्सक की सलाह के केवल एंटीबायोटिक्स लेने से बचें।

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