केंद्र ने बांटे 1.10 लाख करोड़, राजस्थान की झोली में आए अतिरिक्त 6,460 करोड़
जयपुर, त्योहारों के सीजन में राजस्थान के खजाने में केंद्र सरकार की ओर से 6,460 करोड़ रुपये आए हैं। केंद्र ने राज्यों को अतिरिक्त टैक्स डिवोल्यूशन यानी कर हस्तांतरण की एक और किस्त जारी की है। 31 अक्टूबर को जारी इस रकम का मकसद राज्यों को त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले खर्चों को पूरा करने के साथ विकास कार्यों की रफ्तार तेज करने में मदद करना है। खास बात यह है कि राजस्थान को मिली यह रकम नियमित मासिक कर हस्तांतरण के अतिरिक्त है। ऐसे में राज्य सरकार के पास विकास और जनकल्याण से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध होगी।
केंद्र सरकार ने राज्यों को कुल 1.10 लाख करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह रकम नियमित मासिक हिस्से के अलावा एक अग्रिम किस्त के रूप में दी गई है। चालू वित्त वर्ष में केंद्र की ओर से राज्यों को अतिरिक्त कर हस्तांतरण की यह दूसरी किस्त है। अब सवाल यह है कि राजस्थान को मिले 6,460 करोड़ रुपये की इस रकम के पीछे क्या गणित है और राज्यों को इससे क्या फायदा मिलने वाला है?
राजस्थान को 6,460 करोड़, बड़े राज्यों में मिली जगह
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से केंद्र सरकार की ओर से जारी रकम में राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये मिले हैं। इस आवंटन के साथ राजस्थान उन राज्यों में शामिल है, जिन्हें इस बार बड़ी राशि मिली है। राज्यों को मिलने वाली रकम में अंतर उनके निर्धारित कर हिस्से के अनुसार है। इस सूची में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। यूपी को 19,208 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बाद बिहार को 10,845 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। राजस्थान को मिली राशि महाराष्ट्र के बाद बड़े आवंटनों में शामिल है।
त्योहारों के सीजन में क्यों जारी की गई अतिरिक्त रकम?
त्योहारों के दौरान राज्यों में सार्वजनिक खर्च की जरूरत बढ़ जाती है। इस अवधि में विभिन्न सरकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों के लिए भुगतान की जरूरत बनी रहती है। ऐसे में केंद्र की ओर से अतिरिक्त राशि मिलने से राज्यों को अपने खर्चों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
केंद्र सरकार के मुताबिक, अग्रिम कर हस्तांतरण जारी करने का उद्देश्य राज्यों को पूंजीगत खर्च में तेजी लाने और विकास एवं कल्याण से जुड़े खर्चों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है। यानी यह रकम केवल त्योहारों के खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं को गति देने में भी किया जा सकता है।
नियमित किस्त से अलग है यह रकम
राज्यों को केंद्र सरकार के करों में निर्धारित हिस्से के अनुसार नियमित रूप से राशि मिलती है। इस बार जारी 1.10 लाख करोड़ रुपये की रकम नियमित मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त है। इसका अर्थ है कि राज्यों को सामान्य किस्त के अलावा पहले ही अतिरिक्त पैसा उपलब्ध कराया गया है।
राजस्थान के लिहाज से 6,460 करोड़ रुपये का यह आवंटन इसलिए अहम है, क्योंकि इससे राज्य सरकार को विकास और जनकल्याण से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश मिल सकती है। हालांकि, इस राशि का राज्य में किन-किन योजनाओं या परियोजनाओं पर कितना इस्तेमाल होगा, इसका ब्योरा अलग से सामने आने पर ही तस्वीर साफ होगी।
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