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पितृ ऋ ण से मुक्ति और पूर्वजों के आशीर्वाद का पर्व श्राद्ध शुरू - पहले दिन हुआ पूर्णिमा का श्राद्ध - तर्पण, जल और हुआ पिंड दान
By Lokjeewan Daily - 26-09-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन।  सनातन संस्कृति में पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने का पावन पर्व 'पितृ पक्ष आज से वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में पूरी आस्था के साथ शुरू हो चुका है। हिंदू धर्मशास्त्रों में श्राद्ध पक्ष का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व अत्यंत गूढ़ बताया गया है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए तर्पण, जल और पिंड दान को स्वीकार करते हैं। श्राद्ध का शाब्दिक अर्थ ही  श्रद्धा  है, अर्थात अपने दिवंगत परिजनों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करना और उनके उपकारों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना। ऐसा माना जाता है कि पितरों के तर्पण से न केवल पितृ दोष शांत होते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। पेच के बालाजी मंदिर के महंत पंडित आशुतोष शर्मा के अनुसार, इस वर्ष पितृ पक्ष का शुभारंभ भादवा शुक्ला पूर्णिमा के पहले श्राद्ध से आज शनिवार 26 सितंबर को पूरे दिन से हो चुका है। इसके बाद आसोज कृष्णा एकम यानी प्रतिपदा का श्राद्ध रविवार 27 सितंबर को संपन्न होगा। तिथियों के क्रम में द्वितीया श्राद्ध 28 सितंबर, तृतीया 29 सितंबर तथा चतुर्थी श्राद्ध 30 सितंबर को प्रात: 10  से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। वहीं 1 अक्टूबर गुरुवार को पंचमी (दोपहर 10.30 से 12.25) और छठ (दोपहर 12.30 से 2 बजे) का श्राद्ध एक ही दिन होगा। इसके बाद सप्तमी से लेकर चतुर्दशी तक के श्राद्ध 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर के बीच प्रात: 10.30 बजे के बाद क्रमबद्ध तरीके से संपन्न किए जाएंगे।
पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर शनिवार को सर्व पितृ देव कार्य अमावस्या के साथ होगा, जहां समस्त ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त अंतिम तर्पण किया जाएगा। इसके ठीक अगले दिन, 11 अक्टूबर रविवार को घट स्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का महापर्व शुरू हो जाएगा, जिसके लिए शुभ मुहूर्त प्रात: 8 से 12:40 बजे और दोपहर 2 से 3.15 बजे तक रहेगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में गाय, कौए, कुत्ते और चींटियों को भोजन कराने से पितृगण अत्यंत प्रसन्न होकर परिवार को आरोग्य और कल्याण का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

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